अपना घर आश्रम में सेवा को उपकार नहीं दायित्व समझा जाता हैं: एडीजीपी राजाबाबू सिंह
अपना घर आश्रम में सेवा को उपकार नहीं दायित्व समझा जाता हैं: एडीजीपी राजाबाबू सिंह
मानव की असामयिक मृत्यु का शिकार होने से बचाना ही हमारा धेय: माधुरी भारद्वाज
शिवपुरी में 300 आवासीय पुरूष प्रभू सदन का हुआ भूमि पूजन कार्यक्रम संपन्न
शिवपुरी ब्यूरो। अपना घर आश्रम शिवपुरी के द्वारा जनसहयोग से निर्मित 300 आवासीय क्षमता के पुरूष प्रभू सदन का भूमिपूजन का आयोजन बांसखेड़ी शारदा साल्वेंट के पास एबी रोड़ पर महाकाल मंदिर पुजारी रामेश्वर दयाल शास्त्री, मुख्य अतिथि के रूप में अरतिक्ति पुलिस महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक ग्वालियर जोन राजाबाबू सिंह, माधुरी भारद्वाज बृज वारिस सेवा सदन अपना घर संस्था भरतपूर, वीरेन्द्र रघुवंशी की धर्मपत्नि विभा रघुवंशी, इन्द्रप्रकाश गांधी, रमेशचन्द्र अग्रवाल मंचासीन रहें। इस अवसर पर राजाबाबू सिंह ने दानदाताओं को सम्मानित करते हुए गीता भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। जिनमें इन्द्रप्रकाश गांधी एवं रमेशचन्द्र अग्रवाल जिन्होंने अपना घर आश्रम के लिए डेढ़-डेढ बीघा जमीन दान दी हैं।
भूमि पूजन कार्यक्रम के अवसर पर राजाबाबू सिंह ने कहा कि अपना घर आश्रम एक ऐसा सदन हैं जहां सेवा को पूजा एवं मानव सेवा को माधव सेवा माना जाता हैं। सेवा को उपकार नहीं दायित्व समझा जाता हैं। यह सब विचारधारा पर केन्द्रि होता हैं। अपना घर परिवार ऐसे आश्रयहीन असहाय प्रभू स्वरूप पीडि़तों को अपनाता हैं। इन दीन जनों के पास पीड़ा के समय में भूख के लिए भोजन, दर्द के लिए दवा, तन के लिए कपड़ा तो दूर की बात हैं, जीवन के अंतिम समय में पानी तक नसीब नहीं होता हैं उनकी सेवा के लिए अपना घर आश्रम हैं। श्री सिंह ने कहा कि माधुरी भारद्वारज का उदाहरण देते हुए कहा कि अपना घर आश्रम की संकल्पना 2000 से हुई थी। वह कोई घर नहीं हैं सिर्फ विचारधारा हैं। किस बात की विचारधारा जिसके पास अपना घर न हो अपना संसंसाधन न हो उसके पास कोई सहारा देने वाला न हो उसके लिए यह आश्रम हैं। इस अवसर पर उन्होंने आगे कहा कि नर सेवा ही नारायण की सेवा हैं। राजाबाबू सिंह ने इस अवसर पर स्वयं 11 हजार रूपए की राशि भेंटकर अपना घर आश्रम के आजीवन सदस्य भी बने। बृज वारिस सेवा सदन अपना घर संस्था भरतपूर माधुरी भारद्वाज संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी आश्रयहीन असहाय, लावारिस, बीमार को सेवा एवं संसाधनों के अभाव में वेदनादायक, पीड़ा एवं असामयिक मृत्यु का शिकार होने बचा सकें इसी परिकल्पना को साकार करने हेतु अपना घर आश्रम का संचालन किया जा रहा हैं। श्रीमती भारद्वाज ने बताया कि वर्तमान में यह संस्थाद्वारा देश भर में 36 प्रकल्प संचालित हैं। जिनमें एक नेपाल में और 35 देश भर में जिनमें से एक शिवपुरी में भी हैं जहां लगभग 30 प्रभूजी की सेवा की जा रही हैं। जिसमें अपना घर आश्रम भरतपुर सेवा एवं विशिष्टता की दृष्टि का सबसे बड़ा केन्द्र हैं। जहां आज भी 3500 प्रभूजी हैं। शिवपुरी अपना घर आश्रम में आज तक 293 प्रभू जी आ चुके हैं और लगभग 30 प्रभूजियों को ठीक करके सुरक्षित उन्हें अपने घर पहुंचा दिया गया हैं। इतना ही नहीं कई प्रभूमि आज भी अपना घर सेवाश्रम में ठीक होकर रह रहे हैं। वहीं महिला प्रभूजियों को भरतपुर भेज दिया जाता हैं। इस अवसर पर गौरव ने बताया कि प्रभूजी एक सम्मानीय शब्द हैं और उदाहरण उन्होंने कहा कि जिस तरह मंदिर में खण्डित प्रतिमा होती हैं तो उसे विसर्जित कर दिया जाता हैं लेकिन जीवंत व्यक्ति को पुन: उपचार कराकर ठीक करने का काम अपना घर आश्रम कर रहा हैं। इस अवसर पर कार्र्यक्रम को रमेशचन्द्र, रामेश्वर शर्मा, समीर गांधी, पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह चंदेल सहित अन्य सदस्यों ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम शुभारंभ अवसर पर अतिथियों का शॉल श्रीफल भेंट कर सम्मानित भी किया गया। जिसमें वरिष्ठ पत्रकार अलोक एम इंदौरिया, पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह चंदेल को शॉल श्रीफल एवं गीता भेंट कर संस्था के सदस्यों द्वारा सम्मानित किया। इस अवसर पर कार्यक्रम में रमेशचन्द्र अग्रवाल, शीतलचन्द्र जैन, गोविन्द प्रसाद ंबंसल, कैलाश नारायण दुबे, भगवान लाल सिंघल, गोपाल कृष्ण बंसल, राजेन्द्र कुमार गुप्ता, विमल कुमार जैन, नरेन्द्र कुमार गुप्ता, कैलाश नारायण दुबे सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
मानव की असामयिक मृत्यु का शिकार होने से बचाना ही हमारा धेय: माधुरी भारद्वाज
शिवपुरी में 300 आवासीय पुरूष प्रभू सदन का हुआ भूमि पूजन कार्यक्रम संपन्न
शिवपुरी ब्यूरो। अपना घर आश्रम शिवपुरी के द्वारा जनसहयोग से निर्मित 300 आवासीय क्षमता के पुरूष प्रभू सदन का भूमिपूजन का आयोजन बांसखेड़ी शारदा साल्वेंट के पास एबी रोड़ पर महाकाल मंदिर पुजारी रामेश्वर दयाल शास्त्री, मुख्य अतिथि के रूप में अरतिक्ति पुलिस महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक ग्वालियर जोन राजाबाबू सिंह, माधुरी भारद्वाज बृज वारिस सेवा सदन अपना घर संस्था भरतपूर, वीरेन्द्र रघुवंशी की धर्मपत्नि विभा रघुवंशी, इन्द्रप्रकाश गांधी, रमेशचन्द्र अग्रवाल मंचासीन रहें। इस अवसर पर राजाबाबू सिंह ने दानदाताओं को सम्मानित करते हुए गीता भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। जिनमें इन्द्रप्रकाश गांधी एवं रमेशचन्द्र अग्रवाल जिन्होंने अपना घर आश्रम के लिए डेढ़-डेढ बीघा जमीन दान दी हैं।
भूमि पूजन कार्यक्रम के अवसर पर राजाबाबू सिंह ने कहा कि अपना घर आश्रम एक ऐसा सदन हैं जहां सेवा को पूजा एवं मानव सेवा को माधव सेवा माना जाता हैं। सेवा को उपकार नहीं दायित्व समझा जाता हैं। यह सब विचारधारा पर केन्द्रि होता हैं। अपना घर परिवार ऐसे आश्रयहीन असहाय प्रभू स्वरूप पीडि़तों को अपनाता हैं। इन दीन जनों के पास पीड़ा के समय में भूख के लिए भोजन, दर्द के लिए दवा, तन के लिए कपड़ा तो दूर की बात हैं, जीवन के अंतिम समय में पानी तक नसीब नहीं होता हैं उनकी सेवा के लिए अपना घर आश्रम हैं। श्री सिंह ने कहा कि माधुरी भारद्वारज का उदाहरण देते हुए कहा कि अपना घर आश्रम की संकल्पना 2000 से हुई थी। वह कोई घर नहीं हैं सिर्फ विचारधारा हैं। किस बात की विचारधारा जिसके पास अपना घर न हो अपना संसंसाधन न हो उसके पास कोई सहारा देने वाला न हो उसके लिए यह आश्रम हैं। इस अवसर पर उन्होंने आगे कहा कि नर सेवा ही नारायण की सेवा हैं। राजाबाबू सिंह ने इस अवसर पर स्वयं 11 हजार रूपए की राशि भेंटकर अपना घर आश्रम के आजीवन सदस्य भी बने। बृज वारिस सेवा सदन अपना घर संस्था भरतपूर माधुरी भारद्वाज संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी आश्रयहीन असहाय, लावारिस, बीमार को सेवा एवं संसाधनों के अभाव में वेदनादायक, पीड़ा एवं असामयिक मृत्यु का शिकार होने बचा सकें इसी परिकल्पना को साकार करने हेतु अपना घर आश्रम का संचालन किया जा रहा हैं। श्रीमती भारद्वाज ने बताया कि वर्तमान में यह संस्थाद्वारा देश भर में 36 प्रकल्प संचालित हैं। जिनमें एक नेपाल में और 35 देश भर में जिनमें से एक शिवपुरी में भी हैं जहां लगभग 30 प्रभूजी की सेवा की जा रही हैं। जिसमें अपना घर आश्रम भरतपुर सेवा एवं विशिष्टता की दृष्टि का सबसे बड़ा केन्द्र हैं। जहां आज भी 3500 प्रभूजी हैं। शिवपुरी अपना घर आश्रम में आज तक 293 प्रभू जी आ चुके हैं और लगभग 30 प्रभूजियों को ठीक करके सुरक्षित उन्हें अपने घर पहुंचा दिया गया हैं। इतना ही नहीं कई प्रभूमि आज भी अपना घर सेवाश्रम में ठीक होकर रह रहे हैं। वहीं महिला प्रभूजियों को भरतपुर भेज दिया जाता हैं। इस अवसर पर गौरव ने बताया कि प्रभूजी एक सम्मानीय शब्द हैं और उदाहरण उन्होंने कहा कि जिस तरह मंदिर में खण्डित प्रतिमा होती हैं तो उसे विसर्जित कर दिया जाता हैं लेकिन जीवंत व्यक्ति को पुन: उपचार कराकर ठीक करने का काम अपना घर आश्रम कर रहा हैं। इस अवसर पर कार्र्यक्रम को रमेशचन्द्र, रामेश्वर शर्मा, समीर गांधी, पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह चंदेल सहित अन्य सदस्यों ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम शुभारंभ अवसर पर अतिथियों का शॉल श्रीफल भेंट कर सम्मानित भी किया गया। जिसमें वरिष्ठ पत्रकार अलोक एम इंदौरिया, पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह चंदेल को शॉल श्रीफल एवं गीता भेंट कर संस्था के सदस्यों द्वारा सम्मानित किया। इस अवसर पर कार्यक्रम में रमेशचन्द्र अग्रवाल, शीतलचन्द्र जैन, गोविन्द प्रसाद ंबंसल, कैलाश नारायण दुबे, भगवान लाल सिंघल, गोपाल कृष्ण बंसल, राजेन्द्र कुमार गुप्ता, विमल कुमार जैन, नरेन्द्र कुमार गुप्ता, कैलाश नारायण दुबे सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

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