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सहकारी बैंक कोलारस में करोड़ो के घोटाले की जांच रिपोर्ट से खलबली

सहकारी बैंक कोलारस में करोड़ो के घोटाले की जांच रिपोर्ट से खलबली

80 करोड़ 56 लाख रूपए से अधिक का घोटाला उजागर, राकेश पाराशर सहित 10 आरोपी मुख्य साजिशकर्ता

घोटाले में बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कुशवाह, सहस्त्रबुद्धे, सागर, वायके सिंह और लताकृष्णन की भी अप्रत्यक्ष सहभागिता, अंकेक्षक, माईग्रेशन ऑडिटर सहित बैंक वित्तदायी संस्था भी सवालों के घेरे में 


शिवपुरी। केन्द्रीय सहकारी बैंक कोलारस में विगत 8 वर्षो में जांच दल ने 80 करोड़ 56 लाख 21 हजार 342 रूपए का घोटाला प्रमाणित पाया है। जांच प्रतिवेदन में राकेश पाराशर सहित श्रीकृष्ण शर्मा, राकेश कुलश्रेष्ठ, सौरभ मेहर, ज्ञानेंद्रदत्त शुक्ला, रमेश कुमार राजपूत, कु. रेणू शर्मा, प्रभात भार्गव, रामप्रकाश त्यागी और हरिवंशशरण श्रीवास्तव को घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है। जिन्होंने गवन, धोखाधड़ी और फर्जी अभिलेख बनाकर वास्तविक रूप में उपयोग किए तथा अभिलेखों में हेराफेरी की। इन आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने बैंक की कुल मिलाकर 80 करोड़ 56 लाख रूपए से अधिक की राशि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के बैक के खाते में जमा न करते हुए अपने, अपने रिश्तेदारों या मित्रों के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में स्थित खातों में जमा कराई। आरोपियों के विरूद्ध भादवि की धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120बी के तहत कोलारस थाने में मामला दर्ज कराया गया है। जिन खातों में राशि जमा की गई है, वह भी जांच के दायरे में आ गए हैं। मुख्य साजिशकर्ताओं के अलावा जांच में यह भी पाया गया कि अपराध अवधि 1 अप्रैल 2010 से 31 जुलाई 2021 के मध्य बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सहित एएस कुशवाह, मिलेंद्र सहस्त्रबुद्धे, डीके सागर, वायके सिंह तथा श्रीमति लताकुष्णन द्वारा भी अपने कर्तव्य और दायित्व का पालन न करते हुए मुख्य अपराधियों को अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग दिया और साजिश में उनकी अप्रत्यक्ष सहभागिता रही। जांच में यह भी उजागर हुआ है कि बैंक के ऑडिटरों ने भी लगातार 10 वर्षो से भी अधिक हो रहे गवन, धोखाधड़ी के अपराध पर कोई आक्षेप नहीं लिया और उन्होंने मुख्य गवन तथा धोखाधड़ी करने वालों को लगातार अपराध करने का अवसर प्रदान किया। जहां तक कि कुछ ऑडिटरों ने यह प्रमाण पत्र भी दिया कि बैंक की कोलारस शाखा में कोई गवन और धोखाधड़ी का प्रकरण नहीं पाया गया। जबकि गवन, धोखाधड़ी के प्रकरण विभिन्न वर्षो में लगातार बढते रहे हैं। जांच प्रतिवेदन में यह भी उल्लेख है कि बैंक के सांविधिक अंकेक्षक और माईग्रेशन ऑडिटर की भी गवन में अप्रत्यक्ष सहभागिता रही है। बैंक की वित्तदायी संस्था अपेक्स बैंक तथ बैंक के सीबीएस सॉफ्टवेयर की भूमिका भी संदिग्ध है। घोटाले के मुख्य साजिशकर्ता केन्द्रीय सहाकारी बैंक के अधिकारी या कर्मचारी हैं। जिन्होंने अपने रिश्तेदारों और मित्रों के खाते में आरटीजीएस या अन्य माध्यमों से राशि स्थानांतरित कर आहरित की है। 

इस मामले में सहकारिता विभाग के उपायुक्त मुकेश कुमार जैन ने कोलारस थाने में आरोपियों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कराई है। श्री जैन ने बताया कि केन्द्रीय बैंक मर्यादित शिवपुुरी में आर्थिक अपराध की सूचना मिलने पर बैेंक की वित्तदायी संस्था राज्य सहकारी बैंक मार्यादित भोपाल द्वारा जिला बैेंक की जांच सहकारी अधिनियम की धारा 59 के अंतर्गत कराने का अनुरोध किया गया था। जिसके आधार पर 4 अगस्त 2021 केो जांच आदेश जारी किए गए। जांच दल द्वारा प्रस्तुत अंतिरम एवं अंतिम जांच प्रतिवेदन के आधार पर आयुक्त सहकारिता द्वारा दिए गए निर्देश के पालन में प्रथम सूचना रिपोर्ट अपराध दर्ज कराने हेतु की जा रही है। जांच दल ने पाया कि 19 करोड़ 27 लाख 92 हजार रूपए की राशि कोलारस शाखा द्वारा एसबीआई में अपनी शाखा के संधारित खाते से विभिन्न तिथियों में 186 चैकों के माध्यम से राशि आहरित कर बैंक में जमा न करते हुए सीधे गवन किया गया। इसी प्रकार 47 करोड़ 46 लाख 16 हजार 469 रूपए की राशि कोलारस शाखा एसबीआई बीजीएल से राशि आहरण कर एसबीआई चालू खाते में जमा करने हेतु ले जाया गया। किंतु खाते में जमा न करते हुए कुछ व्यक्तियों के खाते में काल्पनिक रूप से जमा कर उस दिनांक या अन्य दिनांकों को नेफ्ट किया गया। 11 करोड़ 94 लाख 44 हजार रूपए की राशि कोलारस शाखा द्वारा पुराने एचओ एडजस्टमेंट बीजीएल को नगद नामे कर जिला बैंक शिवपुरी में जमा करने हेतु राशि आहरित की गई। किंतु किसी भी बैंक शाखा में जमा नहीं कर राशि का गवन किया गया। 1 करोड़ 12 लाख माईग्रेशन डिप्रेंशी को नामे कर उपरोक्त दर्ज टेवल के अनुसार संबंधितों के खाते में जमा किया गया। इस तरह से कुल 80 करोड़ 56 लाख रूपए की राशि का गवन किया गया। 

जिन खातों में राशि जमा हुई वह भी जांच के दायरे में 

गवन की भारी भरकम राशि कोलारस शाखा से अन्य बैंकों में स्थित कुछ चिन्हित व्यक्तिगत खातों में नेफ्ट की गई है। उनमें से अधिकांश खाते एसबीआई शाखा के हैं। चूकि गवन की राशि एसबीआई बैंक के व्यक्तिगत खातों के माध्यम से हड़पी गई है। इसलिए उन खातों एवं खाताधारियों की जांच भी होना सुनिश्चित है और जांच प्रतिवेदन में इस बात का भी जिक्र किया गया है। बैंक में गवन, अमानत में ख्यानत, न्यास भंग, धोखाधड़ी, साजिश, फर्जी अभिलेख तैयार कर उन्हें असली के रूप में प्रयोग करना आदि अपराध प्रमाणित होता है।

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